सोमवार, 21 दिसंबर 2009

भ्रष्टाचार

          लोग कहतें हैं की स्वाइन फ्लू , कैंसर, डाईबीटीज, ब्लड प्रेशर आदि बीमारिआं देश को जकड़े हुए है और कम से  कम 45 प्रतिशत इन बीमारिओं के कारन इस देश की प्रगती ठप पड़ी  हुई है. पर शायद ही कुछ लोग ही यह मानते हैं या जानते हैं की ये बीमारिआं प्रगति के ठप्प पड़े रहने से कोई ताल्लुक नहीं रखती हैं. पर एक दूसरी बीमारी जरूर है और उसका नाम भ्रष्टाचार है.
  
           लोग अफसरों को टैक्स (TAX) या कर देतें हैं और अफसरों को वह टैक्स सरकार को जमा करवाना होता है. और सरकार उसक टैक्स को लोगों के भले के लिए इस्तेमाल करती है. अब अगर अफसर टैक्स को सरकार को नहीं पहुंचाते हैं तो सरकार के पास लोगों के भले के लिए पैसे नहीं होते और अगर पैसे नहीं है तो भला क्या प्रगति  हो सकती है. और देश रहता है जहाँ का तहां.  न तो  प्रगति की राह पर आगे बढ़ता है और न ही किसी और जगह पर. 
                   
             
             स्कूल में बच्चो को सिखाया जाता है की जब वे कमाने लायक हो जाए तब ईमानदारी से टैक्स दें. पर जैसे जैसे उन्हें पता चलता है की टैक्स देने के बावजूद कोई प्रगति नहीं हो   रही है, मतलब या तो अफसर उन पैसों को खा रहे हैं या फिर सरकार उन्हें ठीक से इस्तेमाल नहीं कर रही है. तब वे भी टैक्स  देना बंद कर देतें हैं. तब सरकार सोचती है की लोग टैक्स नहीं दे रहे हैं और टैक्स के कीमत बढ़ा डी जाती है और टैक्स न देने  पर  काफी कड़क नीयम बनाएं जातें हैं.
           
                             अब   कई बार देखा जाता है की कई लोग गैर कानूनी काम करते हुए पकडे जाते हैं और अपने गले पर से लटकती तलवार को हटाने के लिए रिशवत खोर अफसरों को एक अच्छा कड़क नोट पकड़ा कर हो जाते हैं नौ दो ग्यारह. इस तरह से तीन काम हो जातें हैं. अफसर के जेब भर जाती है और अपनी खाली. अपने गले पर लटकती तलवार हट जाती है और प्रगती ठप्प पडी रहती है. 
              तो  लोगों उस "जागो इंडिया जागो" वाले विज्ञापन को अपनाओं और मारो एक जोर का धक्का इस देश की प्रगति को.

 धन्यवाद!!!!!!!!!!!!!!!!!    

रविवार, 20 दिसंबर 2009

किसी चीज की कमी उस चीज का मूल्य बताती है

कहानी :
एक अमीर आदमी का एक बारह साल का लड़का था। उसको अपने माता पिता ने अपने लड़ प्यार से बिगाड़ रखा था। वह अपनी जेब खर्च को फिसूल के कामों में खूब उड़ाया करता था। जब वह 25 वर्ष का हुआ तब उसके माँ बाप तीर्थ यात्रा के लिए चले गए और अपनी सारी जायदाद को उसके नाम कर दिया।

हुआ यूं कि जब उसके माता पिता तीर्थ यात्रा के लिए जा रहे थे तो उनकी गाडी का एक्सिडेंटहो गया और उनकी मृत्यु हो गयी। उनके बेटे को एक पत्र भेजा गया जिसमे उसके माता पिता की दुखद मृत्यु समाचार था।
पर उनके बेटे को अपने लैटर बॉक्स देखने का वक़्त ही कहाँ था, वह तो अपने दोस्तों के साथ पार्टियां मानाने में व्यस्त था।
अपनी बचपन की आदत से मजबूर होते हुए उसने बिना किसी रोक के एक महीने में करीब 3 लाख रूपय खर्च करता था।
धीरे धीरे उसके पैसे ख़त्म होने लगे। और जैसा की होना ही था एक दिन उसके पैसे पूरे ख़त्म हो गए।
जब उसके पास पैसे थे तब उसे उनकी असली कीमत पता नहीं चली पर जब उसके पैसे ख़त्म हो गए उसे पता चला आखिर पैसे की कीमत क्या होती है।
ठीक उसी तरह शायद आपकी जिंदगी में जरूर कोई न कोई ऐसी चीज होगी जिसकी अभी आपको कीमत पता नहीं है , पर जरूर एक न एक दिन अप्पको उसकी कीमत पता चलेगी।
अगर आपको ऐसी कोई चीज याद नहीं आ रही है तो मिसाल के लिए लीजिये अपनी धरती, अभी तो हमें अपनी धरती की कीमत पता नहीं है पर एक न एक दिन जरूर पता चल जायेगी पर तब तक बहुत देर हो चुकी होगी तो, अभी से ग्लोबल वार्मिंग को ध्यान दीजिये।

धन्यवाद । । ।