मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

दोस्ती

       इस ब्रह्माण्ड मैं तीन  ऐसीं चीजें हैं जिन्हें कभी खो कर वापस नहीं पाया जा सकता वो हैं दोस्ती, प्यार, और समय . 
   एक दोस्त को कभी खो कर वापस नहीं   पा सकते अगर आप उसे वापस मन भी लें तो वो दोस्ती किसी कच्चे धाघे की तरह होगी.
        यकीन मानियें ऐसा मेरे साथ भी हो चूका है. 
   चलिए मैं बयान करता हूँ मेरे दोस्त की और मेरी दोस्ती की दास्ताँ .
   मेरा एक दोस्त है जिसका नाम है तन्मय परमार मैं उसके साथ मेरी चौथी क्लास से पढ़ रहा हूँ . 
    इस साल के आठवें महीनें मैं एक फूटबाल के मैच मैं उसकी कुछ गलतियों की वजह से हम हार गए. मैं अब मानता हूँ की मुझे    
   उस वक़्त ऐसा नहीं करना चाहिए था परन्तु उस वक़्त मेरे दिमाग मैं इस बात का ख़याल ही नहीं आया और हमारे बीच कुछ      
   आनाकानी हो गयी और वह मुझसे रूठ गया उसे मानाने के लिए मुझे कई पापड़ मेलने पड़े पर उस वक़्त मुझे दो चीजो का  
   अनुभव हुआ की अगर एक दोस्त आपसे नाराज हो जाये तो काफी मेहनत से उस दोस्तों को मना सकते है और की अपने मन  
   पर काबू   रखो. चाहे परिस्थितियाँ कुच्छ भी हो .
   अगर मेरे जैसा कोई युवा लेखक या कोई और मुझसे छोटा जन पढ़ रहा हो तो मैं चाहूँगा की आप भी अपने दोस्त का मूल्य  
   पहचानियें क्योंकि ऐसे दोस्त ज़िन्दगी मैं कभी कभी ही मिलते हैं. 
अगर वो खो जाएँ तो ज़िंदगी का असली मतलब भी खो जाता है.    

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