बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

बाघ

चोर ! चोर! हमारे घर मैं चोर. 
अगले दिन पता चला की चोरी किसी घरवाले ने ही की थी. 
 उस का नाम मुझे तो नहीं पता और शायद किसी को नहीं पता.
अगर  मेरी इस छोटी सी कोशिश से आप समझ गए हों की मैं अपने देश को घर , चोर को शिकारी , और घरवाले से मेरा मतलब है की अपन मैं से ही कोई . जो चीज चोरी हुई वह थी देश का अभिमान देश का राष्ट्रीय पशु बाघ. अब भारत मैं सिर्फ 1300 बाघ बचे हैं 
मैं   जहाँ पढता हूँ वहां पर लगभग 70 साल हर दिन एक बाघ दिखता था और अब वहां उनका नामोनिशान मिट चुका है. आबू पर्वत पर आखरी बार बाघ को 1985 मैं देखा गया था. तो बस अंदाज़ा लगा लीजिये की सिर्फ चालीस सालों मैं वहा पर से बाघ गायब हो गया. मगर अब भी देर नहीं हुई है और न कभी होगी जब तक की आखरी बाघ न मारा जाये.
मुझे तो यह बिलकुल वैसा लगता है जैसे किसी नें अपने राष्ट्रीय झंडे का अपमान कर दिया और वहा और कोई नहीं बल्कि एक हिन्दुस्तानी था. अगर आप खुद ऐसा  कर रहे हो तो मेरी आपसे गुज़ारिश है की भगवान के लिए ऐसा मत कीजिये. और अगर आप ऐसा नहीं कर रहे हो और अपनी पहचान वाला कोई  व्यक्ति ऐसा कर रहा है तो उसे भी मेरी तरफ से गुज़ारिश कीजियेगा. 
मेरे  इस पोस्ट का प्रेरणा सोत्र है एक विज्ञापन. अगर आपने वह देखा हो तो. 
नोट: अगर आप इस बात को मेरी गुज़ारिश की तौर पर नहीं मानते तो कृपया अपना धर्म मान कर कीजिये.

2 टिप्‍पणियां:

  1. देवेय,
    बहुत अच्छा लगा कि आपको इतनी चिंता है..राष्ट्रिय पशु इसी सम्मान और संरक्ष्ण का हक़ दार है..आप ने अपनी पोस्ट में अपनी जगह माउन्ट आबू की जानकारी देने का प्रयास किया है यह अप डेट जानकार अच्छा लगा...अपनी पोस्ट इसी तरह से मेहनत कर के लिखोगे तो सबको अच्छा लगेगा....

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